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एक चुटकुला

Written By: Usree Bhattacharya on May 10, 2009 1 Comment

मैं दिल्ली में एक अनाथाश्रम गयी दो साल पहले. वहां कुछ बच्चों के साथ मैंने बात की. मैं उन्हें अंग्रेजी सीखने के बारे में पूछ रही थी. सब बच्चे बोल रहे थे की वे सोचते थे कि अंग्रेजी सीखने से ही वे कुछ बन सकते हैं. इंटरव्यू के बीच में एक बच्चे ने पूछा,

सुमित: दीदी, मैं एक चुटकुला सुनाऊँ?
मैं: हां, हाँ, सुनाओ.
सुमित: एक छोटा बच्चा होता है. उसकी मम्मी उसे इंडिया भेजती है इंग्लिश सीखने के लिए.
मैं: इंडिया भेजती है! कहाँ से भेजती है इंडिया?
सुमित: दिल्ली से इंग्लिश सीखने भेजती हैं. इंग्लिश सीख के आता है. फिर खाना खाने बैठता है. खाना खाता है,
मैं: हाँ.
सुमित: फिर गले में चावल अटक जाता है. बोलता है, “वाटर, वाटर.” उसकी मम्मी को समझ नहीं आता है. वह बोलता है, “वाटर, वाटर.” फिर मर जाता है.
मैं: ओहो! मर जाता है! अच्छा! तो इसका मतलब क्या हुआ?
राहुल: वहां तो पानी नहीं दे रही.
मैं: हाँ, तो इसका मतलब क्या हुआ? फिर अंग्रेजी नहीं सीखनी चाहिए क्या?
देव: इंग्लिश में उसकी मम्मी समझती नहीं थी, इस लिए “वाटर” बोले-
मैं: -वही तो!-तो इसका मतलब क्या है, क्या अंग्रेजी नहीं सीखनी चाहिए? या अपनी मम्मी से अंग्रेजी में बात नहीं करनी चाहिए?
देव: उसकी मम्मी को पता नहीं. अगर अपनी मम्मी को पता नहीं हो-
मैं: वही, तभी अंग्रेजी बोलना चाहिए.

यह कहानी मैं भूल नहीं पाती हूँ. यह बच्चे बोलते तो ज़रूर हैं कि अंग्रेजी सीखना ज़रूरी है, पर इस कहानी को सुनके पता चलता है कि वह सोचते हैं कि अंग्रेजी सीख कर हम कुछ खोते हैं. अपनी ज़बान से ज्यादा कुछ खोते हैं.

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One Response to “एक चुटकुला”

  1. JinshiKay on: 11 May 2009 at 12:37 am

    Project why में दो महिने पहेले
    आशिष एक जवान teacher है। Project why में पढ़ा रहा है गंदी बस्ती के क्षेत्र के बच्चों को और university में अध्‍यापन-शास्‍त्र पढ़ रहा है। मैं हूँ उसको भी फ़्रांसीसी भाषा पढ़ाने आती हुँ।
    आशिष : हम्हें विदेशी भाषाऐं सीखनी पड़ती हैं क्यों ?
    उसका सवाल सुनते ही मैं आश्चर्य से थोड़ी देर में चुप-चाप रहती रही। उससे कौंनसा जवाब दे सकूँ ? फ़्रसीसी पढ़ने की क्या ज़रुरत है उसको ? फिर सोचने बिना के अपने आप शाब्द निकल गए मेरे मूँह से।
    मैं : अगर हम्हें सब भाषाऐं आती होती तो दुनियां को हमारी समझ में आती होगी।
    तुरंत डर से चुप रही। पर उसने बोला : औफ़ औह क्या बात है ! यह सचमुच सच्चाई होती है!
    उसको इस नई भाषा पढ़ने के लिए राज़ी कर लिया था मैने।

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